पुलवामा Terror Attack और कश्मीरियों के साथ सुलूक पर sarcasm से ली है इस पत्रकार ने

पूरा ही भारत पुलवामा में हुए टेरर अटैक से बहुत आहात हुआ. लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे भी लोग हुए जो जोश में इंसानियत की भी सारी सीमाएँ नान्घने लग गए. कब ये आतंकियों का गुस्सा सारे के सारे कश्मीरियों के खिलाफ हो गया पता ही नहीं चला. आतंकियों को भूलकर कहीं कोई आम कश्मीरियों को गोली से मरने को कह रहा है तो कोई कश्मीर पर एटम बम गिराने को बोल रहा है.

और ये सारी बात करते हुए भी वो बोल रहे है कि कश्मीर हमारा है. कश्मीर तो भारत का है पर फिर कश्मीरी भारत के क्यों नहीं? इसी सब से शायद परेशान होकर “द लल्लनटॉप” के पत्रकार केतन ने अपने एक साथी कि लिखी हुई पोस्ट facebook पर डाली है जो पुरे मुद्दे पर sarcasm का सहारा लेकर रौशनी डालती है.

क्या कहती है पोस्ट Pulwama attack, Kashmiri, Muslim, Government को

कश्मीरियों से सवाल करो, जहां दिखें मार दो. भूल जाओ कि उन कश्मीरियों में हमारी आर्मी के औरंगजेब भी होते हैं.

मुसलमानों से सवाल करो. देशभक्ति साबित करने के लिए कहो. अगर वो अटैक की निंदा करें लगे हाथ वंदेमातरम बुलवा लो. वो भी बोल दें तो पाकिस्तान मुर्दाबाद बुलवा लो. वो भी बोल दें तो कहो अब सिर के बल चलकर दिखाओ. न दिखाएं तो धड़ाक से एंटी नेशनल घोषित करो. 

सिद्धू से सवाल करो. हम साला यहां अपने सैकड़ों जवान और कुर्बान करने को बैठे हैं ये उल्लू का पट्ठा बातचीत करने को कह रहा है. युद्ध का एडवेंचर इसको पता ही नहीं है. इसको शो से नहीं देश से निकलवाओ. 

सिकुलरों से सवाल करो. इनको सालों को पता ही नहीं है कि हमारे देश में आतंकी हमले से लेकर डेंगू मलेरिया तक की वजह मुसलमान हैं.


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पत्रकारों से सवाल करो जो कश्मीरियों की वकालत कर रहे हैं. इन लम्पटों को बताओ कश्मीर हमारा है, कश्मीरी नहीं. कश्मीरियों को कश्मीर में नहीं जहन्नुम में रहना है.

विपक्ष से सवाल करो. ये पगले सरकार के साथ क्यों खड़े हैं. अपने प्रोग्राम रद्द करके हमको गरियाने का मौका नहीं दे रहे हैं. 

पेड़ों से सवाल करो. ये साले हरी पत्तियां क्यों ओढ़े हुए हैं. पाकिस्तान का झंडा ओढ़कर बैठे हैं. एंटीनेशनल साले.

सामने दिख रही हर एक चीज़ से सवाल करो, बस जिम्मेदारों से सवाल मत करो. जेम्स बॉन्ड से मत पूछो कि NSA किस बात के बने हो? सरकार से मत सवाल करो कि सर्वदलीय बैठक बुलाकर भाषण देने क्यों चले गए? ज़िम्मेदारों की ज़िम्मेदारी यही है कि अपनी ज़िम्मेदारियां कश्मीरियों-मुसलमानों पर कैसे उड़ेलें. 

और आख़िरी बात, इस पर राजनीति मत करो. उसका ठेका देशभक्षों के पास है.

~ Ashutosh Ujjwal का पोस्ट जो कि हटवा दिया गया. लेकिन क्या है कि अभी हममें जड़ें नहीं निकली हैं. अभी हम पेड़ नहीं हुए हैं. बाकी, “सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्…” वाला मामला तो टीवी एंकरों ने संभाला ही हुआ है.


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